राष्ट्रीय पटल पर चमका कुमाऊं विवि का नाम, कुलसचिव प्रो. रीतेश साह का यूजीसी अंतर-विश्वविद्यालय केंद्र शिमला के लिए चयन

नैनीताल। Kumaun University Registrar प्रो. रीतेश साह का चयन देश की सर्वोच्च अकादमिक संस्थाओं में शुमार भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS), शिमला में संचालित यूजीसी अंतर-विश्वविद्यालय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान केंद्र (UGC-IUC) की प्रतिष्ठित एसोसिएटशिप के लिए हुआ है। इस उच्च स्तरीय अकादमिक मानद उपाधि के लिए पूरे देश से कड़ी चयन प्रक्रिया के माध्यम से केवल 99 उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन किया गया है, जिसमें प्रो. रीतेश साह ने अपनी जगह बनाकर उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमकाया है।

इस उच्च स्तरीय अकादमिक मानद उपाधि के लिए पूरे देश से कड़ी चयन प्रक्रिया के माध्यम से केवल 99 उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन किया गया है, जिसमें प्रो. रीतेश साह ने अपनी जगह बनाकर उत्तराखंड और कुमाऊँ विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमकाया है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी, शिमला की ओर से आधिकारिक रूप से पत्र जारी कर उन्हें इस चयन की बधाई और सूचना दी गई है।

कड़े राष्ट्रीय मानकों के बीच हुआ चयन

शिमला स्थित यह संस्थान देश में उच्चतर शोध और अकादमिक संवाद का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर वर्ष देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों के बीच एक बेहद जटिल और कड़े मानदंडों वाली चयन प्रक्रिया अपनाई जाती है। आवेदकों के वर्षों के शोध कार्य, पुस्तकों के प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में उनके शोध-पत्रों की गुणवत्ता और अकादमिक क्षेत्र में उनके समग्र योगदान का सूक्ष्म मूल्यांकन करने के बाद ही राष्ट्रीय स्तर की यह एसोसिएटशिप प्रदान की जाती है। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलसचिव का चुना जाना उनके उत्कृष्ट अकादमिक स्तर को साबित करता है।

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रक्षा मंत्रालय से मिल चुके हैं दो राष्ट्रीय पुरस्कार

प्रो. रीतेश साह का अकादमिक और शोध करियर शुरू से ही बेहद शानदार और उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्हें पूर्व में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, उन्होंने देश और प्रदेश की सर्वोच्च शोध संस्थाओं जैसे- भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) तथा उत्तराखंड सरकार के वित्तीय सहयोग से पांच महत्वपूर्ण शोध परियोजनाएं (Research Projects) सफलतापूर्वक पूरी की हैं।

शोध और अकादमिक जगत में व्यापक योगदानमानविकी, इतिहास और वाणिज्यिक विषयों के अंतःविषय (Interdisciplinary) शोध के क्षेत्र में प्रो. रीतेश साह का काम बेहद सराहनीय है। उनके अकादमिक खाते में अब तक

  • 06 प्रतिष्ठित पुस्तकें और 01 मोनोग्राफ शामिल हैं।
  • देश-विदेश के उच्च स्तरीय जर्नल्स में 50 से अधिक शोध-पत्र (Research Papers) प्रकाशित हो चुके हैं।
  • उनके कई उच्च गुणवत्ता वाले शोध-पत्र दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और अकादमिक प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) में प्रकाशित हुए हैं।
  • वर्तमान में वे स्प्रिंगर नेचर की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में एक सहकर्मी समीक्षक (Peer Reviewer) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो उनकी विषय विशेषज्ञता को दर्शाता है।
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कुशल मार्गदर्शक और व्याख्याता

एक शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में प्रो. साह ने उच्च शिक्षा को नए आयाम दिए हैं। उनके कुशल निर्देशन में अब तक 11 पीएच.डी. (Ph.D.) शोधार्थियों ने अपनी डिग्री सफलतापूर्वक पूरी की है। इसके अतिरिक्त, वे प्रतिष्ठित एमिटी विश्वविद्यालय में भी एक शोधार्थी के सह-मार्गदर्शक (Co-Guide) के रूप में जुड़े रहे हैं। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के कार्यक्रमों और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में उन्हें एक मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया जाता रहा है, जहां वे दर्जनों आमंत्रित व्याख्यान और अकादमिक वार्ताएं दे चुके हैं।

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा और शोध को मिलेगा बढ़ावा

वर्तमान में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में प्रशासनिक और अकादमिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे प्रो. रीतेश साह को मिली यह एसोसिएटशिप तीन वर्षों के लिए होगी। इस अवधि के दौरान उन्हें शिमला संस्थान के समृद्ध पुस्तकालय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों के साथ संवाद करने और उत्कृष्ट अकादमिक वातावरण में अपने शोध को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। मानविकी, सामाजिक विज्ञान और इतिहास के क्षेत्र में उनका यह शोध अनुभव आने वाले समय में उत्तराखंड के युवाओं और शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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विश्वविद्यालय परिवार में जश्न और बधाई का तांता

इस महान राष्ट्रीय उपलब्धि की सूचना मिलते ही कुमाऊँ विश्वविद्यालय और नैनीताल के अकादमिक हल्कों में खुशी की लहर दौड़ गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने इसे कुमाऊँ विश्वविद्यालय के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए प्रो. साह को बधाई दी।इसके साथ ही प्रो. संजय पंत, प्रो. दिव्या यू जोशी, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. महेंद्र राणा, प्रो. एन.जी. साहू, प्रो. ललित तिवारी, डॉ. पूरन सिंह अधिकारी, डॉ. गगनडीप होती, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. दीपक, डॉ. मोहित और डॉ. हृदेश सहित विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे उत्तराखंड उच्च शिक्षा जगत के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।

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