उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जारी मूसलाधार बारिश भी बाबा नीम करौरी के भक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकी। कैंची धाम आश्रम (Kainchi Dham Ashram) से सामने आई इस अद्भुत तस्वीर में हज़ारों श्रद्धालु भारी बारिश और ठंड के बीच रंग-बिरंगे छातों और रेनकोट के सहारे कतारों में लगकर बाबा के दिव्य दर्शनों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट…
Category: संस्कृति और समाज
देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध कुमाऊंनी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और समाज की झलक।
पित्रों के श्राद्ध कल से: पितृ पक्ष में 15 दिनों तक रहेगा पूर्वजों की सेवा का महापर्व, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और तर्पण के नियम
pitron-ke-shradh कल से शुरू हो रहे हैं। भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक चलने वाले इन 15 दिनों में पूर्वजों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है। जानिए इस वर्ष तर्पण का सबसे शुभ मुहूर्त, तिथियां, पंचबलि भोग के नियम और इस दौरान क्या करें और क्या न करें। पूरी जानकारी के लिए क्लिक करें।
नैनीताल में 124वें नंदा देवी महोत्सव की भव्य शोभायात्रा शुरू: मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंजी सरोवर नगरी,शाम को होगा नैनीझील में विसर्जन
सरोवर नगरी नैनीताल में पारंपरिक छोलिया नृत्य और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ मां नंदा-सुनंदा की भव्य शोभायात्रा शुरू हो गई है, जिसमें खराब मौसम के बावजूद हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। नगर भ्रमण के पश्चात सांयकाल मां की मूर्तियों का नैनीझील में विसर्जन किया जाएगा। पूरी जानकारी के लिए समाचार पोर्टल पर विजिट करें।
मां नंदा देवी महोत्सव की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, SSP डॉ. मंजुनाथ टी.सी. ने खुद संभाला मोर्चा
एनटीडी न्यूज के अनुसार, एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टी.सी. ने मां नंदा देवी महोत्सव नैनीताल की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए मेला क्षेत्र, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और यातायात रूटों का सघन निरीक्षण किया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेला क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
कजरारी आंखें और बेमिसाल सादगी! इस बार नैनीताल में मूर्तिकारों ने मां नंदा-सुनंदा के चेहरे पर बिखेरी अनोखी सौम्यता
Maa Nanda Sunanda Nainital महोत्सव में इस बार स्थापित प्रतिमाओं की अलौकिक सौम्यता और ममतामयी मुस्कान ने देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया है। जानिए केले के पत्तों और तनों (कदली वृक्ष) से बनी इन पूर्णतः ईको-फ्रेंडली मूर्तियों के निर्माण की अनोखी परंपरा, भक्तों की भारी भीड़ और मायके आई लाडली बेटियों की भावुक विदाई की पूरी कहानी।