नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड की आस्था और समृद्ध लोक संस्कृति के प्रतीक, ऐतिहासिक 124वें Shri Nanda Devi Mahotsav Nainital का सरोवर नगरी नैनीताल में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ भव्य आगाज हो गया है। श्री राम सेवक सभा द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथि सांसद एवं पूर्व रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट और विशिष्ट अतिथि विधायक सरिता आर्य ने किया। उद्घाटन सत्र की शुरुआत पंडित भगवती प्रसाद जोशी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराई, जिसके बाद अतिथियों ने पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन कर मुख्य पूजा-अर्चना संपन्न की।
महोत्सव की शुरुआत बेहद आकर्षक और पारंपरिक अंदाज में हुई। सबसे पहले नैनीताल के प्रसिद्ध गोल घर से ‘छोलिया मित्रों’ के दल ने कुमाऊँनी वाद्यों की मधुर धुनों पर थिरकते हुए सभी अतिथियों की अगवानी की। यहाँ सभी अतिथियों को पारंपरिक चुन्नी और कुमाऊँनी टोपी पहनाकर उनका आदर-सत्कार किया गया। इसके बाद छोलिया नृत्य के मुख्य जुलूस के साथ सभी अतिथि श्री राम सेवक सभा भवन पहुंचे, जहां उनका तिलक लगाकर भव्य स्वागत हुआ। सभा भवन पहुंचते ही पूरा माहौल ‘मां नंदा-सुनंदा की जय’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। मंच पर राम सेवक सभा के नन्हे बाल कलाकारों ने बेहद सुंदर गणेश वंदना और श्री नंदा स्तुति प्रस्तुत कर वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

संस्कृति ही हमारा असली आधार: अजय भट्ट
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सांसद अजय भट्ट ने कहा कि संस्कृति हमारी पहचान और हमारा मुख्य आधार होती है। यह मानव जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और आनंद से भर देती है। उन्होंने मां नंदा-सुनंदा के चरणों में प्रार्थना की कि देश और प्रदेश का हर नागरिक सुखी, समृद्ध और पूरी तरह स्वस्थ रहे। वहीं, स्थानीय विधायक सरिता आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि मां नंदा देवी उत्तराखंड के कण-कण और यहाँ के लोगों के दिलों में समाई हुई हैं। वह प्रकृति के साथ हमें हिमालय जैसी विशालता, धैर्य और असीम ऊर्जा प्रदान करती हैं।
मंगोली गांव के लिए रवाना हुआ कदली दल
महोत्सव की सबसे प्राचीन और मुख्य परंपरा का निर्वहन करते हुए, यशपाल रावत द्वारा भेंट किए गए 21 पौधों की अतिथियों ने विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद तय परंपरा के अनुसार, अतिथियों ने लाल और सफेद रंग के पवित्र ध्वज ‘कदली दल’ (मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों के निर्माण के लिए केले के पेड़ लेने जाने वाली टोली) के सदस्यों को सौंपे। यह दल मां के जयकारों के बीच पवित्र वृक्ष लेने के लिए मंगोली गांव की ओर रवाना हो गया। उद्घाटन सत्र के समापन पर सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न के रूप में मां नंदा-सुनंदा का भव्य चित्र भेंट किया गया।
सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर
इस बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है। उद्घाटन सत्र में मेला अधिकारी ने जनता और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मेले के दौरान नैनीताल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। साथ ही, भारी भीड़-भाड़ को देखते हुए विशेषकर महिलाओं से अपने कीमती आभूषणों और सामान की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने को कहा। इससे पहले राम सेवक सभा के महासचिव जगदीश बावरी ने महोत्सव में पहुंचे सभी अतिथियों और भक्तों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम का कुशल और सफल संचालन संयुक्त रूप से हेमंत बिष्ट, मीनाक्षी कीर्ति, नवीन पांडे और प्रोफेसर ललित तिवारी ने किया।
1926 से लगातार सेवा कर रही राम सेवक सभा
इस महोत्सव का इतिहास अपने आप में बेहद अनूठा और गौरवशाली है। नैनीताल में इस सांस्कृतिक महोत्सव की शुरुआत साल 1903 में हुई थी। इसके बाद साल 1926 से श्री राम सेवक सभा इस मेले को लगातार पूरी निष्ठा, भव्यता और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित करती आ रही है।
यह रहे मौजूद – दर्जा राज्यमंत्री शांति मेहरा, दिनेश आर्य, गोपाल रावत, मनोज जोशी, हेम आर्य, सीओ अंजना नेगी, मनोज साह, घनश्याम लाल साह, अशोक साह, राजेंद्र बिष्ट, बिमल चौधरी, बिमल साह, भुवन बिष्ट, रेशमा टंडन, सुनीता वर्मा, राजेंद्र लाल साह, देवेंद्र लाल साह, घनश्याम जोशी, हीरा रावत, आनंद बिष्ट, एडवोकेट मनोज साह, प्रदीप जेठी, पुष्पा बावरी, जीवंती भट्ट, सभासद जीनू पांडे, सभासद अंकित चंद्रा, सभासद भागवत रावत, ललित साह, तेज सिंह, गीता सह, अमिता साह, मोहित लाल साह, भीम सिंह कार्की और दिनेश भट्ट सहित सैकड़ों श्रद्धालु और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।