उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल में ऐतिहासिक 124वें माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव Nainital Nanda Sunanda Mahotsav 2026 का सबसे मुख्य और पवित्र पड़ाव शुरू हो चुका है। नंदाष्टमी के पावन अवसर पर रात ठीक 12 बजे वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष अनुष्ठान और प्राण प्रतिष्ठा के साथ मां नंदा-सुनंदा की भव्य मूर्तियों को मंदिर में स्थापित कर दिया गया है। मूर्तियों की स्थापना पूरी होते ही अब आज तड़के सुबह ब्रह्म मुहूर्त से मां के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। कुमाऊं की कुलदेवी के दीदार पाने के लिए प्रसिद्ध माँ नयना देवी मंदिर परिसर में भोर की पहली किरण के साथ ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी, जिसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है।
इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता मां की मूर्तियों का निर्माण है। हर साल की तरह इस बार नैनीताल के समीप मंगोली गांव से पारंपरिक रीति-रिवाजों और ढोल-दमाऊ की थाप के साथ पवित्र ‘कदली वृक्ष’ (केले के पेड़) को मंदिर लाया गया था। इसके बाद स्थानीय मूर्तिकारों और श्री राम सेवक सभा के स्वयंसेवकों ने पूरी रात जागकर बांस, कपास, पारंपरिक वस्त्रों और प्राकृतिक रंगों की मदद से इन भव्य मूर्तियों को जीवंत रूप दिया, जिन्हें रात 12 बजे मुख्य मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया।

23 सितंबर तक चलेंगे सांस्कृतिक व धार्मिक अनुष्ठान
16 सितंबर से शुरू हुआ यह भव्य महोत्सव 23 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। आज तड़के सुबह से शुरू होने वाला दर्शन का यह सिलसिला अगले चार दिनों तक लगातार चलेगा। मंदिर समिति के अनुसार, 19 से 22 सितंबर तक प्रतिदिन माँ नयना देवी मंदिर परिसर में दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन, महाआरती, हवन और भव्य कन्या पूजन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, 21 सितंबर को प्रसिद्ध डीएससी मैदान में विशाल महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 22 सितंबर की शाम को नैनी झील में महा-दीपदान का भव्य आयोजन होगा।
23 सितंबर को होगी विदाई
इस आठ दिवसीय महोत्सव का समापन 23 सितंबर को होगा। इस दिन मां नंदा-सुनंदा की भव्य डोला यात्रा (शोभायात्रा) पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ पूरे नैनीताल नगर में निकाली जाएगी, जिसके बाद पाषाण देवी मंदिर के समीप नैनी झील में अश्रुपूर्ण आंखों से मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। प्रशासन ने तड़के जुटने वाली भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।