सिर्फ 10 हजार रुपये से शुरू हुआ था सफर, आज देश-विदेश तक पहुंच रही सोंधी खुशबू
नैनीताल (Pahadi Namak) कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों और मिट्टी से जुड़ाव सच्चा हो, तो पहाड़ जैसी चुनौतियां भी घुटने टेक देती हैं। उत्तराखंड में जहाँ एक ओर युवा रोजगार की तलाश में शहरों की तरफ भाग रहे हैं, वहीं नैनीताल के रामगढ़ विकासखंड के एक छोटे से गाँव नथुवाखान के हरीश सिंह बिष्ट ने इसके ठीक उलट कर दिखाया। उन्होंने बड़े शहरों की नौकरी को लात मारी, हाथ में पारंपरिक सिलबट्टा थामा और उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद को अपनी नई पहचान बना लिया। आज उनका यह देसी अंदाज न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना चुका है, बल्कि कई अन्य परिवारों के घरों में भी समृद्धि का दीया जला रहा है।
हरीश बिष्ट की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। विभिन्न संस्थाओं में काम करने के दौरान उन्होंने ऑर्गेनिक और हर्बल उत्पादों के महत्व को समझा। साल 2022 में उन्होंने महज 10 हजार रुपये से भी कम की जेबपूंजी के साथ पार्ट-टाइम काम शुरू किया था। शुरुआती रिस्पॉन्स देखकर उनका हौसला बढ़ा और साल 2023 में उन्होंने इसे अपना फुल-टाइम बिजनेस बना लिया। अपनी कड़ी मेहनत और शुद्ध पहाड़ी स्वाद के दम पर आज हरीश का सालाना टर्नओवर 11 लाख रुपये के आंकड़े को छू चुका है।
सिलबट्टे की सोंधी खुशबू का मुरीद हुआ पूरा उत्तराखंड
हरीश बिष्ट के तैयार किए पहाड़ी मसाला नमक (Pahadi Namak) में उत्तराखंड की वादियों का जादू है। इस विशेष नमक को बनाने में वह जीरा, हींग, लहसुन, अजवाइन, भांग दाना, जाखिया, भंगिरा, पुदीना, राई और सेंधा नमक जैसे शुद्ध मसालों का इस्तेमाल करते हैं। मिक्सी के बजाय इसे सिलबट्टे पर पीसने की पारंपरिक विधि इसके स्वाद को दोगुना कर देती है।
यही वजह है कि बाबा नीम करौली के धाम कैंची धाम, भीमताल, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, राणिखेत और कौसानी सहित 250 से अधिक प्रमुख पर्यटक स्थलों पर इस नमक और हरीश के अन्य उत्पादों (जैसे बुरांश जूस, हर्बल टी, पहाड़ी दालें) की भारी डिमांड है। अब तो देश-विदेश से पर्यटक इसे ऑनलाइन भी ऑर्डर कर रहे हैं।
25 हजार की सरकारी मदद और 35 महिलाओं को रोजगार
हरीश की इस जादुई यात्रा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने भी पंख लगाए। मिशन की तरफ से मिली 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद से हरीश ने डिजिटल तौल मशीन और पैकिंग सीलिंग मशीन खरीदी, जिससे काम में तेजी आई। सबसे खूबसूरत बात यह है कि हरीश अकेले आगे नहीं बढ़ रहे हैं; उन्होंने अपने इस बिजनेस से गाँव की 35 ग्रामीण महिलाओं को जोड़कर उन्हें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया है।हरीश बिष्ट की यह सफलता उत्तराखंड सरकार की आत्मनिर्भरता की सोच को जमीन पर सच साबित करती है। हरीश का मानना है कि यदि सरकार रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और प्रमुख पर्यटक स्थलों पर स्थानीय उत्पादों के लिए स्टॉल उपलब्ध कराए, तो पहाड़ का यह पारंपरिक स्वाद पूरी दुनिया में धूम मचा सकता है और पलायन पर पूरी तरह ब्रेक लग सकता है।
सिलबट्टे के पिसे नमक की भारी मांग
हरीश बिष्ट की ओर से तैयार किए जाने वाले इस विशेष पहाड़ी नमक में कई पारंपरिक मसालों का मिश्रण होता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं – जीरा, हींग और लहसुन, अजवाइन, राई और सेंधा नमकपहाड़ी भांग दाना, जाखिया और भंगिरापुदीना और स्थानीय जड़ी-बूटियां मिली होती हैं।
हरीश बिष्ट की यह सफलता उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शिका है जो पलायन के बजाय स्थानीय स्तर पर तकनीक और पारंपरिक ज्ञान से रोजगार के नए अवसर तलाश रहे हैं। उनका यह प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने और पहाड़ी उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है। यदि आप भी अपने क्षेत्र में ऐसा कोई स्वरोजगार, स्टार्टअप या अनोखा प्रयास कर रहे हैं, तो अपनी कहानी हमें जरूर भेजें। हम आपकी सफलता को अपने न्यूज़ पोर्टल के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचाएंगे।