नैनीताल। इस समय सरोवर नगरी में Nainital hotels full होने की स्थिति बन गई है, जिसने पिछले कई सालों के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अक्टूबर के इस लंबे वीकेंड और गांधी जयंती की छुट्टी के कारण देश के कोने-कोने, विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से हजारों की संख्या में सैलानी यहाँ पहुंचे हैं। सैलानियों की आमद इतनी अप्रत्याशित रही कि शहर के तमाम छोटे-बड़े होटल, लॉज और होमस्टे पूरी तरह से पैक हो चुके हैं। शनिवार की सर्द रात में सैकड़ों पर्यटकों को जब मोटी रकम चुकाने के बाद भी सिर छुपाने के लिए कोई कमरा नहीं मिला, तो उन्होंने ऐतिहासिक मॉल रोड के किनारे, अपनी गाड़ियों के भीतर और सार्वजनिक स्टैंडों व बरामदों में चादर व कंबल तानकर रात गुजारी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों ने इस गंभीर स्थिति को उजागर किया है, जिसमें कई परिवार कड़ाके की ठंड के बीच एक बरामदे की फर्श पर कतार में सोए नजर आ रहे हैं।
वहन क्षमता से अधिक पहुंचे सैलानी, प्रशासन के इंतजाम पड़े छोटे
अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही पहाड़ों में गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। ऐसे में खुशनुमा मौसम का लुत्फ उठाने के लिए भारी संख्या में लोग यहां आ गए हैं। नैनीताल की भौगोलिक और ढांचागत क्षमता से कई गुना ज्यादा वाहनों और लोगों के एक साथ प्रवेश करने से पर्यटन नगरी की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं।स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा किए गए तमाम इंतजाम नाकाफी साबित हुए। शनिवार दोपहर होने से पहले ही शहर के सभी प्रमुख पार्किंग स्थल जैसे डीएसए मैदान, सूखाताल और मेट्रोपोल पूरी तरह से ‘हाउसफुल’ हो गए। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए यातायात नियंत्रण के लिए विशेष प्लान लागू किया, जिसके तहत हल्द्वानी रोड से आ रहे वाहनों को रूसी बाईपास और कालाढूंगी रोड से आ रहे वाहनों को नारायण नगर अस्थाई पार्किंग में रोकना पड़ा। वहां से पर्यटकों को शटल टैक्सियों के माध्यम से मुख्य शहर भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद एंट्री प्वाइंट्स पर वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
खुले बरामदों में कट रही रात, गाड़ियाँ बनीं रैनबसेरा
कमरों की तलाश में रात-भर भटकने के बाद जब सैलानियों के सामने कोई रास्ता नहीं बचा, तो कड़ाके की ठंड के बीच उन्होंने खुले स्थानों का सहारा लिया। वायरल हुई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कुमाऊँनी शैली और सुंदर नक्काशीदार लकड़ी के खंभों वाले ऐतिहासिक रिक्शा स्टैंड के नीचे लोग बिस्तर लगाकर सोए हुए हैं। पास में ही उत्तर प्रदेश (UP) और दिल्ली नंबर की गाड़ियां खड़ी हैं।बिना एडवांस बुकिंग के पहुंचे यात्रियों का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन कमरा बुक नहीं किया था, जिसके कारण उन्हें भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। कई सैलानियों ने बताया कि दलालों और कुछ जगहों पर एक सामान्य कमरे के लिए 10 से 15 हजार रुपये तक मांगे जा रहे थे। बजट से बाहर होने और उपलब्धता न होने के चलते छोटे बच्चों व बुजुर्गों के साथ आए परिवारों को पूरी रात गाड़ियों की सीटों पर दुबक कर या फिर ऐसे ही खुले सार्वजनिक ठिकानों पर जागकर काटनी पड़ी।
बाबा नीम करोली के कैंची धाम में भी श्रद्धालुओं का रेला
नैनीताल आने वाले पर्यटकों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस समय भवाली मार्ग पर स्थित बाबा नीम करोली के कैंची धाम के दर्शन करने भी पहुंच रहा है。 कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते भवाली से जोखिया तक लगभग 6 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे यात्रियों को घंटों गाड़ियों में फंसे रहना पड़ा। प्रशासन ने धार्मिक स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शटल सेवा का सहारा लिया है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर गाड़ियों का दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
स्थानीय व्यापारियों की चांदी, पर बुनियादी ढांचे पर उठे सवाल
इस भारी भीड़ से जहां स्थानीय होटल व्यवसायियों, रेस्टोरेंट मालिकों, बोट संचालकों और छोटे दुकानदारों का कारोबार चमका है, वहीं नैनीताल के सीमित संसाधनों पर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वीकेंड पर शहर की ‘कैरिंग कैपेसिटी’ (वहन क्षमता) की जांच होना बेहद जरूरी है, वरना आने वाले समय में परिस्थितियां और भी भयावह हो सकती हैं।