MBPG College Result: छात्र राजनीति के गढ़ में निर्दलीय प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत, 466 वोटों से जीते आर्यन बेलवाल

इसे छात्र राजनीति का सबसे बड़ा रोमांच कहिए या युवाओं के गुस्से का इजहार, लेकिन मंगलवार की आधी रात को कुमाऊं के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में जो कुछ भी हुआ, उसने सूबे के बड़े-बड़े राजनीतिक सूरमाओं के होश उड़ा दिए। जब पूरा हल्द्वानी शहर गहरी नींद में सो रहा था, तब कॉलेज परिसर में धड़कनें थाम देने वाली मतगणना चल रही थी। आखिरकार, रात के सन्नाटे को चीरते हुए जैसे ही लाउडस्पीकर पर आधिकारिक MBPG College Election Result का ऐलान हुआ, वैसे ही कॉलेज को उसका 45वां छात्र संघ अध्यक्ष मिल गया।

इस त्रिकोणीय महामुकाबले में किसी बड़े राजनीतिक दल के रसूख ने नहीं, बल्कि एक बागी छात्र की जिद ने इतिहास रच दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन बेलवाल ने सबको चौंकाते हुए अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने नाम कर ली। आर्यन ने अपने सबसे नजदीकी और दमदार प्रतिद्वंद्वी एनएसयूआई (NSUI) के मेहुल साह को 466 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। वहीं, पिछले दो बार से इस सिंहासन पर राज करने वाली सत्ताधारी छात्र इकाई विद्यार्थी परिषद (ABVP) इस सियासी तूफान में तीसरे स्थान पर जा गिरी।

MBPG College Election वोटों का रोमांचक खेल: पहले राउंड से आखरी राउंड तक की स्टोरी

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मंगलवार सुबह जब मतदान शुरू हुआ था, तभी से हवा का रुख भांपना मुश्किल था। लेकिन जब देर रात मतपेटियां खुलीं, तो शुरुआत से ही आर्यन बेलवाल का जादू सिर चढ़कर बोलता दिखा। चुनाव अधिकारियों द्वारा जारी अंतिम MBPG College Election Result के आंकड़े इस प्रकार हैं:

• विजेता (निर्दलीय): आर्यन बेलवाल – 1,723 वोट

• उपविजेता (NSUI): मेहुल साह – 1,257 वोट

• तीसरा स्थान (ABVP): धीरज बिष्ट – 988 वोट

शुरुआती तीन राउंड में मेहुल साह और आर्यन के बीच कांटे की टक्कर दिख रही थी। हर टेबल पर समर्थक सांसे रोककर बैठे थे। लेकिन पांचवें राउंड के बाद आर्यन बेलवाल ने जो रफ्तार पकड़ी, वह थमी नहीं। 9वें राउंड के आते-आते आर्यन ने 206 वोटों की सुरक्षित लीड बना ली थी। एनएसयूआई के खेमे में मायूसी छाने लगी थी और एबीवीपी के पंडाल में सन्नाटा पसर चुका था। 17वें राउंड तक यह बढ़त 435 वोटों की हो चुकी थी और अंतिम राउंड की घोषणा होते ही आर्यन 466 वोटों से विजयी घोषित कर दिए गए। कॉलेज प्रशासन की आधिकारिक घोषणा देखने के लिए छात्र MBPG College Website पर भी जा सकते हैं।

बगावत की आग में स्वाहा हो गई परिषद की ‘हैट्रिक’

इस चुनाव की सबसे रोचक कहानी पर्दे के पीछे की है। आर्यन बेलवाल कोई बाहरी नहीं, बल्कि एबीवीपी के ही समर्पित कार्यकर्ता थे। उन्होंने महीनों से कॉलेज के गलियारों में पसीना बहाया था। लेकिन ऐन वक्त पर संगठन ने धीरज बिष्ट पर दांव खेल दिया। बस यही मोड़ इस चुनाव का ‘टर्निंग पॉइंट’ बन गया। आर्यन ने संगठन के फैसले के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी किस्मत खुद लिखने की ठानी। उन्होंने निर्दलीय हुंकार भरी और आम छात्रों के बीच जाकर ‘सिम्पैथी कार्ड’ खेला। नतीजा यह हुआ कि एबीवीपी का कोर वोटर दो धड़ों में बंट गया और आर्यन ने बाजी मार ली। धीरज बिष्ट महज 988 वोटों पर सिमट कर रह गए और परिषद की हैट्रिक का सपना चकनाचूर हो गया। यह ऐतिहासिक MBPG College Election Result लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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जब जंग के मैदान में बदला कॉलेज कैंपस

यह चुनाव सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि साख और बाहुबल की जंग भी बन चुका था। मतदान के दौरान दोपहर में माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब एबीवीपी और निर्दलीय गुट के समर्थक आपस में भिड़ गए। कॉलेज गेट के बाहर जमकर लात-घूंसे चले, पथराव हुआ और एक छात्र लूल-लहान हो गया। देखते ही देखते कॉलेज छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस और पीएसी के जवानों ने लाठियां भांजकर हुड़दंगियों को खदेड़ा। इस भारी तनाव और हंगामे के बीच हर एक वोटर ने कड़ी सुरक्षा के घेरे में जाकर अपना वोट डाला।

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आधी रात का जश्न: ढोल, आतिशबाजी और आंसुओं का सैलाब

रात के ठीक 12:30 बजे जैसे ही मुख्य चुनाव अधिकारी ने MBPG College Election Result की घोषणा की, परिसर के बाहर खड़े हजारों छात्रों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जैसे ही आर्यन बेलवाल के नाम की घोषणा हुई, पूरा इलाका ‘आर्यन भाई जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। कड़ाके की ठंड के बावजूद हवा में गुलाल उड़ने लगा और पटाखों की गूंज से आसमान रोशन हो गया।

जीत के बाद भावुक हुए नवनिर्वाचित अध्यक्ष आर्यन बेलवाल की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, “यह जीत मेरी नहीं, बल्कि उन आम छात्रों की है जिन्होंने किसी वीआईपी पार्टी के दबाव में न आकर एक आम छात्र का साथ दिया। मैं कॉलेज के विकास और छात्र हितों के लिए अपनी जान लगा दूंगा।” इस ऐतिहासिक रात ने साबित कर दिया कि छात्र राजनीति में जब युवा बदलाव की ठान लेते हैं, तो बड़े-बड़े सियासी समीकरण धरे के धरे रह जाते हैं।

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