शंखनाद, छोलिया और झील में तैरते हजारों दीये! जानिए 16 सितंबर से शुरू हो रहे नन्दा देवी मेले के सबसे नयनसुख पल

नैनीताल। शंखनाद की गूंज, छोलिया नर्तकों की थिरकती तलवारें और मां नन्दा-सुनन्दा के प्रति अटूट आस्था का अद्भुत नजारा देखना हो, तो इस बार सितंबर में नैनीताल खिंचा चला आइए। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति के सबसे बड़े प्रतीक Nanda Devi Mahotsav 2026 को लेकर पूरी सरोवर नगरी सज-धज कर तैयार हो चुकी है।

श्री राम सेवक सभा के बैनर तले 16 से 23 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस आठ दिवसीय मेले की भव्यता बढ़ाने के लिए इस बार सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी संग पहुंचने की उम्मीद है, जहाँ वे मां की महाआरती कर राज्य की खुशहाली की कामना करेंगे। मेले में कुमाऊंनी संस्कृति को बिल्कुल नए अंदाज में पेश किया जा रहा है।

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महोत्सव की सबसे खास बात यह है कि इस वर्ष स्थानीय महिलाओं के पारंपरिक ‘झोड़ा’ नृत्य, पारंपरिक अखाड़ों और अनूठी झांकियों को विशेष स्थान दिया गया है, जो यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देंगे। उत्सव का शंखनाद 16 सितंबर को दोपहर दो बजे उद्घाटन के साथ होगा, जिसके बाद 17 सितंबर को सूखाताल से कदली वृक्षों की भव्य शोभायात्रा लोक वाद्यों की थाप पर नयना देवी मंदिर पहुंचेगी।

मेले के धार्मिक अनुष्ठानों का रोमांच 18 सितंबर से शुरू हो रहे मूर्ति निर्माण के साथ बढ़ेगा। इसके ठीक अगले दिन 19 सितंबर को शनिवार अष्टमी के पावन मौके पर तड़के ब्रह्म मुहूर्त में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी, जिसके बाद प्रतिदिन सुबह पांच बजे से रात बारह बजे तक लगातार पंच आरती और महाभोग का आध्यात्मिक सिलसिला चलेगा, जिसमें सीएम दंपत्ति के भी शामिल होने की संभावना है।

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20 सितंबर को पूरा परिसर दुर्गा सप्तशती के मंत्रों और कन्या पूजन की खुशबू से महक उठेगा। इसके बाद 21 सितंबर को होने वाले ऐतिहासिक महाभंडारे में हजारों की तादाद में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने जुटेंगे। महोत्सव का सबसे जादुई और नयनसुख देने वाला पल 22 सितंबर की शाम सात बजे आएगा, जब महा-दीपदान के तहत पूरी नैनी झील हजारों जलते दीयों से सराबोर होकर सितारों जैसी टिमटिमा उठेगी।

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अंत में 23 सितंबर को दोपहर बारह बजे से ढोल-दमाऊ की गूंज के बीच मां की विदाई की भव्य डोला यात्रा निकाली जाएगी, जो नगर भ्रमण करते हुए शाम साढ़े छह बजे ग्वेलज्यू मंदिर के समीप विसर्जन के साथ पूरी होगी। श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारियों ने सभी भक्तों से प्रकृति और भक्ति के इस महामिलन का साक्षी बनने की भावुक अपील की है।

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