नैनीताल डीएसबी परिसर छात्रसंघ रण: मैदान से दूर हुई NSUI, त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा अध्यक्ष पद; एक निरस्त नामांकन ने बदला पूरा समीकरण!

नैनीताल जनमत ब्यूरो उत्तराखंड की बौद्धिक और राजनीतिक नर्सरी कहे जाने वाले कुमाऊं विश्वविद्यालय के DSB Campus Student Union Election 2026 का बिगुल बज चुका है। नामांकन पत्रों की जांच के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. मनोज कुमार आर्या की ओर से जारी आधिकारिक सूची ने परिसर की छात्र राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। इस बार का सबसे बड़ा सियासी उलटफेर यह है कि कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) मुख्य मुकाबले और शीर्ष चर्चाओं के मैदान से काफी दूर नजर आ रहा है। वहीं, अध्यक्ष पद पर प्रत्याशियों की अंतिम सूची सामने आने के बाद अब मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है।

DSB Campus Student Union Election 2026 अध्यक्ष पद: इन तीन चेहरों के बीच होगी त्रिकोणीय भिड़ंत

नैनीताल के इस प्रतिष्ठित परिसर में छात्रसंघ के सबसे महत्वपूर्ण अध्यक्ष पद के लिए तीन महारथी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। नामांकन जांच समिति के परीक्षण के बाद जिन तीन प्रत्याशियों के नामांकन वैध पाए गए हैं, वे हैं-

भानु प्रताप सिंह चौहान, शुभम कुमार और हिमांशु आर्या

परिसर के गलियारों में चर्चा है कि इन तीनों प्रत्याशियों के बीच होने वाली यह जंग त्रिकोणीय और बेहद कांटे की होगी। जहां दक्षिणपंथी और वामपंथी विचारधाराओं के बीच अपने वर्चस्व को बचाए रखने की जंग है, वहीं निर्दलीय और बागी तेवर भी इस त्रिकोणीय समीकरण को पूरी तरह प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

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बड़ा झटका: छात्र उपाध्यक्ष पद का एक नामांकन अवैध, टूटा बड़ा सपना

इस बार के चुनाव में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ छात्र उपाध्यक्ष पद पर आया। चुनाव अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, कुणाल वेदी (बीए एलएलबी चतुर्थ वर्ष, सप्तम सेमेस्टर) का नामांकन पत्र समिति की जांच में अवैध (निरस्त) घोषित कर दिया गया है।राजस्व और विश्वविद्यालय के अभिलेखों के गहन मिलान में पाया गया कि 01 जुलाई, 2026 को कुणाल वेदी की आयु 23 वर्ष 02 माह 21 दिन (जन्म तिथि: 10-04-2003) हो चुकी थी। कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्रसंघ संविधान के अनुच्छेद 5(अ) सामान्य अर्हता के आयु सीमा (बिन्दु संख्या 01) के नियमों के तहत, यह आयु सीमा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति की बैठक और कुलपति के अंतिम अनुमोदन के बाद, आवश्यक अर्हता (आयु सीमा) पूरी न करने के कारण उनका नामांकन पूरी तरह खारिज कर दिया गया। इस एक झटके ने एक मजबूत दावेदार के समीकरणों को धूल चटा दी और छात्र राजनीति के सूरमाओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि नियम-कायदों से ऊपर कोई नहीं है।

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एकतरफा मुकाबले: निर्विरोध चयन की ओर बढ़े कुछ पदनामांकन पत्रों की जांच के बाद कई महत्वपूर्ण पदों पर मुकाबला एकतरफा या बेहद सीमित हो गया है, जिससे कुछ संगठनों की राह आसान और कुछ की बेहद मुश्किल हो गई है।

  • छात्र उपाध्यक्ष पद: कुणाल वेदी का पर्चा खारिज होने के बाद अब यहाँ केवल अभिषेक रैकूनी का नाम वैध सूची में है।
  • छात्रा उपाध्यक्ष पद: इस पद पर केवल कुमकुम जोशी का ही एकमात्र वैध नामांकन सामने आया है।
  • सचिव पद: यहाँ भी कमल कार्की अकेले मैदान में डटे नजर आ रहे हैं।
  • सांस्कृतिक सचिव: इस पद पर हर्षित जोशी का नामांकन वैध मिला है।
  • विश्वविद्यालय प्रतिनिधि (UR): इस पद पर केवल तन्मय भंडारी चुनावी रेस में बने हुए हैं।

महिला आरक्षित पदों पर सीधी टक्कर

सयुंक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर छात्राओं के लिए आरक्षित सीटों पर मुकाबला काफी रोचक हो गया है:

  • संयुक्त सचिव पद (छात्रा हेतु आरक्षित): अनुष्का पुरी और गौरी के बीच सीधा और आमने-सामने का मुकाबला है।
  • कोषाध्यक्ष पद (छात्रा हेतु आरक्षित): सृष्टी रावत और विदुषी वर्मा के बीच दिलचस्प चुनावी जंग देखने को मिलेगी।

इसके अलावा संकाय प्रतिनिधियों की बात करें तो कला संकाय से अनिल कुमार, वाणिज्य से संध्या कापड़ी, विधि से दिव्यांशी कौशल और प्रबंध अध्ययन से सानिध्य उप्रेती के नामांकन वैध पाए गए हैं।

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क्या परिसर में खो रही है एनएसयूआई की जमीन?

इस पूरे घटनाक्रम और आधिकारिक सूची पर नजर डालें तो एनएसयूआई (NSUI) इस बार नैनीताल परिसर के इस मुख्य रण से पूरी तरह गायब और दूर दिखाई दे रही है। अध्यक्ष पद पर जहां त्रिकोणीय मुकाबला है, वहां कांग्रेस समर्थित इस छात्र संगठन का कोई बड़ा और प्रभावी चेहरा नजर न आना रणनीतिक विफलता को दर्शाता है। वहीं, अन्य कई पदों पर इकलौते नामांकन आने से यह भी साफ है कि इस बार विपक्ष वैचारिक तौर पर मजबूती से अपना पैनल ही खड़ा नहीं कर पाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनएसयूआई की यह सुस्ती और मैदान से दूरी सीधे तौर पर विरोधी संगठनों (जैसे एबीवीपी और अन्य स्थानीय छात्र गुटों) की राह को बहुत आसान बना देगी।फिलहाल, 26 सितम्बर को जारी हुई इस वैध सूची के बाद अब कैंपस में चुनावी रैलियों, सोशल मीडिया वॉर और क्लास-टू-क्लास कैंपेनिंग का दौर तेज हो गया है। अब देखना यह होगा कि 29 सितंबर को होने वाले इस दंगल में छात्र किसे अपना सिरमौर चुनते हैं!

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