हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के रहे करीबी, नैनीताल से देश को दिए 2 ओलंपियन, खेल जगत के दिग्गज अहमद सिद्दीकी का निधन

नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड के खेल इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय का आज अंत हो गया। नैनीताल के खेल जगत के पितामह, जाने-माने खिलाड़ी, फर्स्ट क्लास अंपायर और खेल प्रशासक Ahmed Siddiqui का मंगलवार (15 सितंबर 2026) को निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे और पिछले करीब एक साल से बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे नैनीताल शहर, विशेषकर खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई है।

पूरे नगर में एक गहरा सन्नाटा और गम का माहौल पसरा हुआ है।अहमद सिद्दीकी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने आप में नैनीताल की खेल संस्कृति की एक पूरी संस्था थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन हॉकी, फुटबॉल और क्रिकेट को समर्पित कर दिया था। आइए उनके जीवन, खेल के प्रति उनके जुनून और उनके उस ऐतिहासिक सफर पर नजर डालते हैं जिसने भारतीय हॉकी को कई अनमोल रत्न दिए।

डीएसए मैदान से था जीवन भर का नाता

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अहमद सिद्दीकी का नाम आते ही नैनीताल के ऐतिहासिक डीएसए ग्राउंड की तस्वीर सामने आ जाती है। अपनी युवावस्था से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक, उन्हें हमेशा डीएसए मैदान में सक्रिय देखा जाता था। चाहे वह खुद एक खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरना हो, एक अंपायर के रूप में निष्पक्ष फैसले देने हों, या फिर नैनीताल ट्रेड्स एसोसिएशन (NTG) और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन (DSA) के रोजमर्रा के कामों को संभालना हो वह हमेशा आगे रहते थे। खेल के प्रति उनके इसी निस्वार्थ समर्पण ने उन्हें नैनीताल के हर खिलाड़ी का चहेता बना दिया था।

खेल कोटे से पुलिस सेवा और वीआरएस

अहमद सिद्दीकी जी की शुरुआती शिक्षा नैनीताल के प्रसिद्ध सीआरएसटी (CRST) इंटर कॉलेज से हुई थी। स्कूल के दिनों से ही खेल के मैदान पर उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की वायरलेस यूनिट में खेल कोटे (Sports Quota) के तहत सरकारी सेवा में शामिल किया गया था। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने पूरी तरह खेल और अपने गृह क्षेत्र की सेवा के लिए व्यक्तिगत कारणों से पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली और वापस आकर पूरी तरह खेल गतिविधियों में रम गए।

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देशव्यापी पहचान और हॉकी के दिग्गजों से गहरा नाता

जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा हुआ करता था, तब से अहमद सिद्दीकी जी की पहचान देश के बड़े खेल हलकों में बन चुकी थी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के खेल गलियारों में उनका खासा सम्मान था।अहमद सिद्दीकी जी का भारतीय हॉकी के उस सुनहरे दौर से सीधा संबंध था जिसे आज हम किताबों में पढ़ते हैं। वह हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद और के.डी. सिंह बाबू जैसे महान और महानतम खिलाड़ियों के बेहद करीबी साथियों में से एक थे। मेजर ध्यानचंद के साथ उनके गहरे संबंध और यादें आज भी पुरानी तस्वीरों के माध्यम से खेल प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

ओलंपियनों के गुरु और मार्गदर्शक

अहमद सिद्दीकी जी का भारतीय खेल जगत को सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि उन्होंने जमीन से प्रतिभाओं को खोजा और उन्हें तराशकर देश के लिए खेलने के काबिल बनाया। नैनीताल से निकले भारतीय हॉकी टीम के दो दिग्गज ओलंपियन—सैयद अली और राजेंद्र सिंह रावत, अहमद सिद्दीकी जी को अपना गुरु और मेंटर मानते थे। सिद्दीकी जी ने इन दोनों खिलाड़ियों के शुरुआती दिनों में उनका हाथ थामा, उन्हें खेल की बारीकियां सिखाईं और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया, जिसके दम पर इन खिलाड़ियों ने ओलंपिक के मंच पर तिरंगा लहराया।

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खेल जगत ने दी अश्रुपूर्ण विदाई

अहमद सिद्दीकी जी के निधन पर उत्तराखंड और देश के विभिन्न खेल संगठनों, पूर्व खिलाड़ियों, अंपायरों और खेल प्रेमियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। स्थानीय खेल संघों ने इसे नैनीताल के खेल इतिहास की एक अपूरणीय क्षति बताया है।एक खिलाड़ी, एक सख्त लेकिन निष्पक्ष अंपायर और एक सच्चे खेल प्रशासक के रूप में उनकी कमी हमेशा खलेगी। खेल के मैदानों पर उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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