नैनीताल। Kumaun University Student Union Election 2026 में बृहस्पतिवार को उस समय अभूतपूर्व हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब पुलिस के एक गोपनीय खुफिया इनपुट ने पूरी चुनावी प्रक्रिया की दिशा बदल दी। धनबल, बाहुबल, आत्मदाह की धमकी और तीखे राजनीतिक टकराव के बीच आखिरकार छात्र महासंघ के चुनाव संपन्न हो गए। तमाम उठापटक के बाद राहत की बात यह रही कि विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया और मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. मनोज कुमार आर्या ने सभी प्रमुख पदों पर पदाधिकारियों के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा कर दी।
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बृहस्पतिवार सुबह जब छात्र नेता और मतदाता मतदान की तैयारियों में जुटे थे, तभी नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी की ओर से कुलपति और डीएसडब्ल्यू (डीन स्टूडेंट वेलफेयर) को भेजे गए एक आपातकालीन ई-मेल ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। पुलिस प्रशासन को खुफिया सूत्रों से यह बेहद संवेदनशील जानकारी मिली थी कि कुछ कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों (UR) को डराने-धमकाने और धनबल व बाहुबल के आधार पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
इस इनपुट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसएसपी ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मतदान से पहले सभी मतदाताओं की अनिवार्य काउंसलिंग और ब्रीफिंग कराने की हिदायत दी। इसके तुरंत बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनावी प्रक्रिया को अचानक बीच में ही रोक दिया।

परिसर में भारी बवाल, आत्मदाह की चेतावनी
जैसे ही चुनाव प्रक्रिया रोके जाने की खबर मतदान केंद्र के बाहर फैली, छात्र नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते पूरा परिसर छावनी और अखाड़े में तब्दील हो गया। छात्र नेताओं ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इस दौरान माहौल उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब पूर्व छात्र महासंघ अध्यक्ष आशीष कबड़वाल ने प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए मौके पर ही आत्मदाह करने की धमकी दे डाली। छात्र के इस कदम से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पॉंव फूल गए। स्थिति की गंभीरता और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए डीएसडब्ल्यू बोर्ड और प्रॉक्टर बोर्ड की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। घंटों चली मैराथन बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने चुनाव स्थगित न करने का फैसला लेते हुए संशोधित चुनावी अधिसूचना जारी की और सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर 11:45 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान प्रक्रिया शुरू कराई।

निर्विरोध चुने गए महासंघ के सूरमा
भारी प्रशासनिक मुस्तैदी और कड़ी सुरक्षा घेरे में संपन्न हुए इस चुनाव के बाद नतीजों ने सबको चौंका दिया। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. मनोज कुमार आर्या ने बताया कि सभी पदों पर प्रत्याशियों का निर्विरोध चयन हुआ है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को तत्काल पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई और उन्हें जीत के प्रमाण पत्र सौंपे गए।
निर्विरोध चुनी गई छात्र महासंघ की नई कार्यकारिणी:
• अध्यक्ष: यतिन पांडे (एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी)
• उपाध्यक्ष: जितेंद्र सिंह धामी (राजकीय महाविद्यालय, सितारगंज)
• छात्रा उपाध्यक्ष: सुपर्णा भक्त (राजकीय महाविद्यालय, गदरपुर)
• सचिव: संचित सिंह (एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खटीमा)
• संयुक्त सचिव: उदिती पांडे (राजकीय महाविद्यालय, हल्द्वानी शहर किशनपुर)
• कोषाध्यक्ष: भुवन चंद्र जोशी (पीएमजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर)
जीत के श्रेय को लेकर भिड़े ABVP और ‘काला झंडा’ संगठन
चुनावी नतीजे घोषित होते ही परिसर के भीतर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। जीत की घोषणा होते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष यतिन पांडे को घेर लिया, उनका जोरदार स्वागत किया और संगठन का स्कार्फ पहना दिया। एबीवीपी ने सोशल मीडिया और परिसर में खुलकर दावा किया कि यतिन पांडे उनके आधिकारिक प्रत्याशी हैं और यह परिषद की बड़ी वैचारिक जीत है।एबीवीपी के इस दावे पर दूसरे प्रतिद्वंद्वी संगठन ‘काला झंडा संगठन’ ने कड़ा ऐतराज जताते हुए मोर्चा खोल दिया। संगठन के पदाधिकारियों ने मौके पर ही कड़ा विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि यतिन पांडे उनके पाले के प्रत्याशी हैं। काला झंडा संगठन के नेताओं ने कहा कि एबीवीपी छात्र राजनीति में जबरन दूसरे की जीत का श्रेय लेने की ओछी कोशिश कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोनों पक्षों के बीच इस बात को लेकर काफी देर तक तीखी बहसबाजी होती रही।
मैं निर्दलीय जीता हूँ, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करूँगा: यतिन पांडे
इस पूरे राजनीतिक घमासान और श्रेय लेने की होड़ पर नवनिर्वाचित अध्यक्ष यतिन पांडे ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। यतिन ने खुलकर कहा, “मैं इस बात से इनकार नहीं करता कि मैं लंबे समय से एबीवीपी का एक निष्ठावान कार्यकर्ता रहा हूँ, लेकिन इस बार की जमीनी हकीकत अलग थी। मैंने विश्वविद्यालय प्रतिनिधि (UR) का चुनाव पूरी तरह निर्दलीय लड़ा था और आज छात्र महासंघ के अध्यक्ष पद पर भी मेरी यह जीत एक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ही हुई है।
“अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए यतिन पांडे ने कहा कि वह किसी दलगत राजनीति के बजाय छात्रों के व्यापक हितों के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा, “मेरी पहली प्राथमिकता कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों में बेहतर कैंपस प्लेसमेंट सुविधाएं मुहैया कराना, छात्रों के लिए रोजगारपरक नए पाठ्यक्रम शुरू करवाना और लंबे समय से लंबित अतिथि व संविदा शिक्षकों के मानदेय की समस्याओं को लेकर ठोस कदम उठाना है।”
पुलिस प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा और निष्पक्षता सर्वोपरि
पूरे घटनाक्रम पर नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा, “पुलिस प्रशासन को खुफिया तंत्र से इनपुट मिले थे कि विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों को कुछ तत्वों द्वारा धनबल और बाहुबल के माध्यम से डराया-धमकाया जा रहा है और प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। छात्र राजनीति में शुचिता और सुरक्षा बेहद जरूरी है। इसी आधार पर मुख्य चुनाव अधिकारी और विश्वविद्यालय प्रशासन को समय रहते पत्र भेजकर आवश्यक सावधानी बरतने, चेकिंग करने और सुरक्षा पुख्ता करने के निर्देश दिए गए थे, ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
“इस ऐतिहासिक और विवादों से घिरे चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में प्रो. ललित तिवारी, प्रो. गीता तिवारी, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. महेंद्र राणा, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. मोहित रौतेला, डॉ. दीपक मेलकानी और डॉ. विजय कुमार सहित भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। फिलहाल, परिसर में शांति है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस निर्विरोध चुनाव और उसके बाद शुरू हुई श्रेय लेने की जंग की चर्चाएं गर्म हैं।