maa nanda sunanda mahotshav: प्रशासनिक रवैये और स्थानीय मेला अधिकारियों की मंशा पर उठाए सवाल

नैनीताल। उत्तराखंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक उत्सव maa nanda sunanda mahotshav के दौरान डोला निकालने के मार्ग को लेकर विवाद गहरा गया है। मां नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रशासनिक रवैये और स्थानीय मेला अधिकारियों की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पुनीत टंडन ने स्पष्ट किया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा दिन-रात काम करके पारंपरिक मार्ग (लोअर मॉल रोड) की लेवलिंग का काम पूरा कर लिया गया है और विभाग की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बावजूद, प्रशासन और मेला अधिकारी सुरक्षा तथा आगामी त्योहारों का बहाना बनाकर माँ के डोले को पारंपरिक रास्ते से ले जाने में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। व्यापार मंडल ने इसे जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ बताते हुए प्रशासन को एक खुली चुनौती दी है।

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प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डोला मार्ग की स्थिति को लेकर व्यापार मंडल के पदाधिकारियों और लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ राजेश पंत जी के बीच रविवार को दो दौर की विस्तृत वार्ता हुई। पहली सुबह लगभग 10:30 बजे और दूसरी शाम को 6:30 बजे आयोजित की गई। सुबह की वार्ता के दौरान, PWD चीफ ने मार्ग में आ रही बाधाओं और रैंप को हटाने के निर्देश देने की बात कही थी। इसके बाद विभाग के इंजीनियरों और श्रमिकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए युद्ध स्तर पर काम शुरू किया।

शाम की वार्ता में स्थिति पूरी तरह साफ हो गई। राजेश पंत ने आधिकारिक तौर पर संपुष्टि की कि लोक निर्माण विभाग ने बारिश और खराब मौसम की परवाह किए बिना दिन-रात मेहनत करके लोअर मॉल रोड (पारंपरिक मार्ग) की लेवलिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। विभाग की ओर से इस मार्ग को डोला यात्रा के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित करते हुए ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है। PWD चीफ के अनुसार, 35 से 40 सीमित लोगों की उपस्थिति के साथ मां का डोला इस पारंपरिक रास्ते से बेहद सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है।

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पुनीत टंडन ने पूर्व में हुए आंदोलनों का स्मरण कराते हुए कहा कि 15 अगस्त से 19 अगस्त तक नैनीताल में दिए गए ऐतिहासिक धरने की सबसे प्रमुख और बुनियादी शर्त यही थी कि मां का डोला हर हाल में अपने पारंपरिक रास्ते से ही निकाला जाएगा। इस शर्त पर प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सहमति जताई थी, क्योंकि यह शहर के हजारों नागरिकों की धार्मिक भावनाओं और सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा विषय है।परंतु, अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ (ट्विस्ट) आ गया है। PWD की ओर से हरी झंडी मिलने और रास्ता पूरी तरह तैयार होने के बावजूद प्रशासन और मेला अधिकारी इस जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि आगामी दिनों में दुर्गा पूजा का समय नजदीक है, जिसके कारण पुलिस बल पर दबाव है और कानून-व्यवस्था को संभालना एक बड़ी चुनौती होगी। इस सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देकर प्रशासन फिलहाल पारंपरिक मार्ग से डोला निकालने के निर्णय को टालने का प्रयास कर रहा है।

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