उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आम जनमानस तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने और व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से एक्शन मोड में है। इसी क्रम में नैनीताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रश्मि पंत ने बुधवार को आयुष्मान आरोग्य केंद्र पहाड़पानी एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुरी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सालयों की स्वास्थ्य सेवाओं, ढांचागत व्यवस्थाओं और दवाओं की उपलब्धता का गहन जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और जन-शिकायतों का तुरंत निपटारा करने के कड़े निर्देश जारी किए।
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने बदलते मौसम को देखते हुए जलजनित रोगों (Waterborne Diseases) की निगरानी को प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में संभावित मरीजों की समय पर पहचान की जाए। इसके साथ ही उनकी आवश्यक जांच, सटीक उपचार और निःशुल्क दवा वितरण की व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लैबोरेट्री और फार्मासिस्टों को अलर्ट रहने तथा जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने को कहा।
ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को लेकर डॉ. रश्मि पंत ने बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित प्रभारियों को निर्देशित किया कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं को समय से पहले बर्थ वेटिंग होम में लाया जाए, जहाँ उनके लिए पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच और सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा, उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रसव के उपरांत महिला और नवजात शिशु को ‘खुशियों की सवारी’ (निःशुल्क वाहन सेवा) के माध्यम से पूरी सुरक्षा के साथ उनके घर तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए।
स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद और हौसला अफजाई
आयुष्मान आरोग्य केंद्र पहाड़पानी में निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने वहां तैनात चिकित्सा अधिकारियों, फार्मासिस्टों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों से सीधा संवाद किया और उनके दैनिक कार्यों की प्रगति जानी। डॉ. पंत ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरी टीम की जमकर हौसला अफजाई की।कर्मचारियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता, मुस्तैदी और संवेदनशील कार्यशैली से ही ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को समय पर बेहतर इलाज मिल सकता है।” उन्होंने पूरी टीम को इसी सेवा भावना के साथ निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।
जनशिकायतों और नकारात्मक खबरों पर तुरंत एक्शन के आदेश
अस्पतालों की छवि और कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए CMO ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समाचार पत्रों, सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों में प्रकाशित होने वाली किसी भी नकारात्मक खबर या जनशिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के मिलते ही तुरंत आंतरिक जांच शुरू कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। डॉ. पंत ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जनता से जुड़ी किसी भी शिकायत को लंबित (पेंडिंग) न रखा जाए और की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) समय सीमा के भीतर जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
ज्योलिकोट और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों की धूम
निरीक्षण कार्यक्रम के साथ-साथ जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सघन चिकित्सा शिविरों का संचालन भी जारी रहा। इसी कड़ी में आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलिकोट में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 60 लोगों की स्वास्थ्य जांच की, 104 लोगों की विस्तृत काउंसलिंग की, 40 मरीजों के ब्लड टेस्ट किए और 11 मरीजों को टेली-कंसल्टेंसी के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श दिलवाया।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल टीमों ने ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करते हुए चोपड़ा तल्ला में 42, बेलवाखान में 34 तथा देवीधुरा में 56 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की। शिविरों में आए सभी जरूरतमंद लोगों को डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार आवश्यक दवाएं मौके पर ही मुफ्त वितरित की गईं।