नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित DSB Campus Student Union Election 2026 में इतिहास रच दिया गया है। छात्र राजनीति के इस महादंगल में निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान ने अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। भानु प्रताप ने न सिर्फ अपने प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से पटखनी दी, बल्कि कैंपस राजनीति के कई पुराने समीकरणों को भी ध्वस्त कर दिया। लेकिन इस समय पूरे उत्तराखंड में इस जीत से ज्यादा चर्चा एक मां के उस अनोखे संघर्ष और अनोखी रणनीति की हो रही है, जिसने इस पूरे चुनाव का पासा ही पलट कर रख दिया।
त्रिकोणीय मुकाबले में विरोधियों को किया पस्त
DSB Campus Student Union Election 2026 का यह चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और कड़ा माना जा रहा था। अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे प्रत्याशियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था। लेकिन जब मतपेटियां खुलीं, तो भानु प्रताप सिंह चौहान की आंधी में विरोधी टिक नहीं सके।
वोटों का पूरा गणित इस प्रकार रहा:
• भानु प्रताप सिंह चौहान (विजेता): 1,355 वोट
• शुभम कुमार (मुख्य प्रतिद्वंद्वी): 873 वोट
• हिमांशु आर्या (तीसरे स्थान पर): 283 वोट
भानु प्रताप ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शुभम कुमार को 482 वोटों के एक बड़े और ऐतिहासिक अंतर से मात दी। इस बार कैंपस के कुल 5,410 मतदाताओं में से 2,535 छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसके तहत कुल 46.85 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया।
DSB Campus Student Union Election 2026: जब बेटे को ‘किंग’ बनाने के लिए मां खुद बन गई ‘छात्रा’
इस चुनाव की सबसे अनोखी, भावुक और हैरान कर देने वाली कहानी भानु प्रताप चौहान की मां बीना चौहान की है। बीना चौहान खुद हल्द्वानी नगर निगम के वार्ड नंबर 10 की निर्वाचित पार्षद हैं और राजनीति के दांव-पेंच अच्छी तरह समझती हैं।
जब भानु ने DSB Campus Student Union Election 2026 से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो लिंगदोह कमेटी और स्थानीय प्रशासन के कड़े नियमों के कारण बाहरी लोगों और राजनीतिक दिग्गजों के कैंपस के भीतर आकर प्रचार करने पर पूरी तरह प्रतिबंध था। चुनाव प्रचार की बागडोर अपने हाथ में लेने के लिए मां बीना चौहान ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने खुद डीएसबी कॉलेज के एमए पॉलिटिकल साइंस (MA Political Science) कोर्स में दाखिला ले लिया।

एक मां, अपनी उम्र और राजनीतिक रसूख को पीछे छोड़, सिर्फ अपने बेटे की ताकत बनने के लिए खुद एक आम छात्रा बनकर हर रोज कॉलेज आने लगी। चूंकि वह कॉलेज की वैध छात्रा थीं, इसलिए उन्हें कैंपस में रुकने से कोई नियम नहीं रोक सकता था। उन्होंने कॉलेज के भीतर छात्राओं के बीच जाकर और क्लास-टू-क्लास घूमकर भानु के लिए ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया, जिसे विरोधी भांप ही नहीं पाए। जब नतीजे आए, तो मां की इस तपस्या ने बेटे के सिर पर जीत का ताज सजा दिया।
DSB Campus Student Union Election 2026: परिसर में जश्न का माहौल, ढोल-दमाऊ की थाप पर थिरके छात्र
जैसे ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भानु प्रताप सिंह चौहान की विजय की आधिकारिक घोषणा की, पूरा डीएसबी परिसर ‘भानु भाई जिंदाबाद’ और ‘छात्रशक्ति जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। डीएसबी परिसर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष भानु प्रताप चौहान ने अपनी इस जीत को कैंपस के आम छात्रों के भरोसे और अपनी मां के संघर्ष को समर्पित किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह मेरी नहीं, डीएसबी परिसर के हर उस छात्र की जीत है जिसने बदलाव के लिए वोट किया। मेरी मां ने मेरे लिए जो किया, उसका कर्ज मैं परिसर के छात्रों के हितों की रक्षा करके और कॉलेज का विकास करके चुकाऊंगा।” उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में दो दिन की छुट्टी की घोषणा की।