तीन अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी नहीं बची अमन की जान, स्वास्थ्य सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

नैनीताल। Jeolikote Waterborne Disease उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैली जलजनित बीमारी (पीलिया और डायरिया) ने एक और हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया है। क्षेत्र में बीमारी की चपेट में आए 26 वर्षीय युवक अमन सोनकर (सौरभ) की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। ज्योलीकोट और आस-पास के गांवों में पिछले दो महीनों से जारी इस स्वास्थ्य संकट में यह तीसरी मौत है। इस घटना के बाद से स्थानीय जनता में स्वास्थ्य विभाग और जल संस्थान के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

कैलाखान निवासी मृतक अमन सोनकर के चचेरे भाई संजय सोनकर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर घोर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के त्योहार पर घर आने के बाद अमन को तेज बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। शुरुआत में उसने ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में डॉक्टरों को दिखाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ।लेकिन बीते दिनों अचानक उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ने लगी और पीलिया के गंभीर लक्षण उभर आए। मंगलवार को उसकी हालत बेहद नाजुक होने पर साथ काम करने वाले मजदूर और परिजन उसे आनन-फानन में बीडी पांडे जिला अस्पताल, नैनीताल लेकर भागे। वहाँ डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर शाम उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।

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सुशीला तिवारी अस्पताल में रात 3 बजे तक नहीं मिला बेड

परिजनों का सबसे गंभीर और संवेदनहीन आरोप हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के आपातकालीन विभाग पर है। परिजनों के मुताबिक, गंभीर स्थिति में तड़प रहे अमन को लेकर जब वे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे, तो वहां रात के करीब तीन बजे तक उसे कोई बेड नसीब नहीं हुआ। आपातकालीन वार्ड के बाहर घंटों तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद उसे बेहद देरी से भर्ती किया गया। उचित और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण अगले दिन बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अमन की मौत हो गई। इस घटना ने पहाड़ के रेफरल सिस्टम और अस्पतालों के इमरजेंसी मैनेजमेंट की पोल खोलकर रख दी है।

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उच्च न्यायालय सख्त, सरकार ने 6 सरकारी इंजीनियरों को किया सस्पेंड

ज्योलीकोट, बेलुवाखान, गेठिया और सड़ियाताल सहित करीब 8 गांवों में फैले इस दूषित पानी के कहर पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) पहले ही कड़ा रुख अपना चुका है। कोर्ट ने इस पूरी स्थिति को “महामारी” (Epidemic) की आशंका मानते हुए शासन से ‘Action Taken Report’ तलब की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों और जिला प्रशासन की शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद पेयजल आपूर्ति में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में जल संस्थान और पेयजल निगम के 6 वरिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में हल्द्वानी और नैनीताल जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, सहायक अभियंता और पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता शामिल हैं।

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400 से अधिक लोग बीमार, ग्राउंड पर दहशत

सरकारी और स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से अब तक 400 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं। अस्पतालों और मेडिकल कैंपों में पीलिया के मरीजों की लाइन लगी हुई है। हालांकि अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर पानी साफ करने की क्लोरीन की गोलियां (Chlorine tablets) और ओआरएस (ORS) पैकेट बांट रही हैं, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह मुस्तैदी पहली मौत के वक्त दिखाई गई होती, तो आज अमन की जान बचाई जा सकती थी।

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