नैनीताल में आस्था का समंदर: मंगोली से नयना देवी मंदिर तक भव्य नगर भ्रमण, कन्धों पर ‘कदली’ और आंखों में श्रद्धा के आंसू

सरोवर नगरी नैनीताल में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक Nanda Devi Mahotsav Nainital के दूसरे दिन भक्ति, परंपरा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। कुमाऊंनी संस्कृति के सबसे बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में से एक इस महोत्सव के दूसरे दिन पारंपरिक विधि-विधान के साथ कदली (केले के पेड़) वृक्षों का भव्य नगर भ्रमण कराया गया। ढोल-दमाऊ, छोलिया नृत्य और माता के जयकारों के बीच पूरी नैनीताल नगरी ‘जय नंदा सुनंदा’ के नारों से गुंजायमान हो उठी।

महोत्सव के तय कार्यक्रम के अनुसार, दूसरे दिन सुबह मंगोली गांव में कदली वृक्षों के चयन और पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। पुरोहित पंडित भगवती प्रसाद जोशी द्वारा संपन्न कराए गए वैदिक पूजा-पाठ के बाद, जड़ सहित दो पवित्र कदली पौधों को माता की मूर्तियों के आधार के रूप में लिया गया।प्रकृति और पर्यावरण संतुलन की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए, परंपरा के अनुसार उसी भूमि पर पर्यावरण प्रेमी यशपाल रावत की ओर से प्रदत्त 21 नए पौधे भी लगाए गए। मंगोली गांव में आयोजित इस मुख्य पूजन में मेहरा परिवार के गणेश, सुरेश, किशन, भीम सिंह, भूपेंद्र, चंदन, भगवत और भुवन सपत्नीक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

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श्वेत और लाल ध्वज के साथ शुरू हुआ नगर भ्रमण

मंगोली से विधि-विधान पूर्वक पूजा के बाद कदली वृक्षों को सुखताल लाया गया, जहां नगर वासियों ने इनका स्वागत किया। इसके बाद भव्य शोभायात्रा (नगर भ्रमण) की शुरुआत हुई। इस यात्रा की सबसे खास बात इसकी पारंपरिक व्यवस्था थी, जिसमें सबसे आगे सफेद ध्वज (शांति और पवित्रता का प्रतीक) और उसके पीछे लाल ध्वज (शक्ति का प्रतीक) चल रहा था। जैसे ही कदली वृक्षों की डोली मां वैष्णवी देवी मंदिर, तल्लीताल पहुंची, वहां पर स्थानीय महिलाओं और भक्तों ने अक्षत (चावल) डालकर मां का आशीर्वाद मांगा और भव्य स्वागत किया।

स्कूली बच्चों की सहभागिता ने बिखेरे संस्कृति के रंग

इस ऐतिहासिक नगर भ्रमण की सबसे खूबसूरत तस्वीर नई पीढ़ी की सहभागिता रही। नैनीताल के लगभग सभी प्रतिष्ठित विद्यालयों के छात्रों ने पारंपरिक परिधानों और अनुशासन के साथ इस यात्रा में हिस्सा लिया।

मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर, नरेंद्र अजय साह जगाती सरस्वती विहार, सी.आर.एस.टी. इंटर कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, सेंट जॉन्स स्कूल, नैनी पब्लिक स्कूल, रामा मोंटेसरी स्कूल, एसडेल मल्लीताल, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ, राजकीय प्राथमिक विद्यालय और उमा लवली नैनी पब्लिक स्कूल

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प्रशासन और जनप्रतिधियों ने भी लगाया कंधा

तल्लीताल धर्मशाला से शुरू होकर यह यात्रा प्रसिद्ध मॉल रोड, चीना बाबा मंदिर और श्रीराम सेवक सभा भवन होते हुए मल्लीताल बाजार पहुंची। इस दौरान समाज के हर वर्ग की एकजुटता दिखाई दी। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, दर्जा राज्य मंत्री दिनेश आर्य, शांति मेहरा, सांसद प्रतिनिधि गोपाल रावत, एसपी डॉ. जगदीश चंद्र, और सीओ अंजना नेगी जैसी प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तियों ने खुद कदली वृक्षों को कंधा देकर पुण्य कमाया। यात्रा में मोहित लाल साह, सावित्री सनवाल, विक्रम साह, और सभासद लता दफौटी भी श्रद्धापूर्वक शामिल रहे।

1903 से चला आ रहा है ऐतिहासिक सफर

नैनीताल के इस सांस्कृतिक महोत्सव का इतिहास बेहद गौरवशाली है। यह महोत्सव साल 1903 से निरंतर आयोजित हो रहा है। शहर की प्रतिष्ठित संस्था श्री राम सेवक सभा साल 1926 से लगातार इस आयोजन को पूरी भव्यता और पारंपरिक शुद्धता के साथ संभाल रही है। सभा की ओर से मनोज साह, जगदीश बावरी, घनश्याम लाल साह, अशोक साह, राजेंद्र बिष्ट, बिमल चौधरी, बिमल साह, भुवन बिष्ट, राजेंद्र लाल साह, देवेंद्र लाल साह, घनश्याम जोशी, हीरा रावत, आनंद बिष्ट, एडवोकेट मनोज साह, प्रदीप जेठी, पुष्पा सभासद जीनू पांडे, अंकित चंद्रा, भागवत रावत, ललित साह, तेज सिंह, भीम सिंह कार्की, दिनेश भट्ट, मंजू रौतेला, युवराज, भगवान, आशु बोरा, गिरीश भट्ट, डॉ. मोहित, एडवोकेट अजय सिंह बिष्ट, कैलाश जोशी और प्रो. ललित तिवारी सहित सैकड़ों पदाधिकारियों ने व्यवस्थाएं संभालीं।

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मां नयना देवी मंदिर में परिक्रमा और प्रसाद वितरण

मल्लीताल बाजार होते हुए जब कदली यात्रा मां नयना देवी मंदिर परिसर पहुंची, तो वहां भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। परंपरा के अनुसार, कदली वृक्षों से माता के मंदिर की तीन परिक्रमा करवाई गई और विशेष पूजा संपन्न हुई। इसके बाद मंदिर परिसर में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को पारंपरिक हलवे और आलू का प्रसाद वितरित किया गया।

कल लोक कलाकार करेंगे मूर्तियों का निर्माण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कदली (केले के वृक्ष) में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति का वास माना जाता है। इसी पवित्र आधार का उपयोग कर कल यानी महोत्सव के तीसरे दिन, कुमाऊं के सिद्धहस्त लोक पारंपरिक कलाकार मां नंदा और मां सुनंदा की भव्य मूर्तियों का निर्माण करेंगे, जिनकी आगामी दिनों में प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

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